सावन की ये बुँदे निर्झर बरस रहा है मोती बनकर तू भौरे सी उड़ जाती है। सहसा देख यूँ मुड़ जाती है ओस तेरे इस चमन को छूता तुझ सा पावन नहीं है दूजा तू मधुबन की राजकुमारी उड़ती परी सी पंखो वाली नैन तेरे मृग जैसे चंचल, देख तुझे आकाश मे हलचल बादल भी बिजली भी तू है वायु के कण कण मे तू है तुझमे सारा सागर ठहरा सागर की मोती सा सुनहरा वन मे कोई मोर नाचती गीतों का सरगम साधती। ऐसे तेरे चाल हैं अनुपम, मन को बांधे रखती प्रियतम! -अमित टंडन (amit kumar)
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*गीत* (निगाहो में जादू है तेरा मुस्कुराना) निगाहों में जादू है तेरा मुस्कुराना मुँह फेर लेना कभी,कभी रूठ जाना मन मेरा क्यूँ? बेचैनी में रहता है तुमसे ना रुख्सत हो जाए डरता है तेरा मेरे पास आना,आके चले जाना निगाहों में जादू...............! नींदों में ख्वाबों ने पागल किया है कातिल अदाओं ने घायल किया है नजरें गड़ाए देखे,फिर नजरें चुराना निगाहों में जादू...............! रब से शिकायत कैसी तुम जो मिल गई चेहरा कँवल के जैसा घूँघट में खिल गई रोज जगाता मुझको तेरा जाग जाना निगाहों में जादू...............! -अमित टंडन "अनभिज्ञ" बरबसपुर कवर्धा 8103892588
उल्लाला छंद -मजदूर दिवस
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*मजदूर दिवस विशेष* महिनत करथँव घाम मा, मन हा नइ अकुलाय जी। मजा करव मैं काम मा, मजदूरी बड़ भाय जी॥ काम करय मजदूर हा, बिना करे आराम जी। इँखरे सेती हे बढ़े, जग भर म ताम झाम जी॥ बनी करे बनिहार हा, जावय जल्दी खेत जी। दिनभर ऊमन काम के, राखय सुग्घर चेत जी॥ छंद साधक -अमित टंडन *अनभिज्ञ* बरबसपुर कवर्धा 8103892588